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23 march 1931 Big Salute to Great Patriots

भारत माता की जय

23 मार्च 1931 ये वो तिथि है जिस दिन हमारे देश के वीर सपूत भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फिरंगी

लोगों ने फ़ासी पर चढ़ा दिया था और इसमें हत्यारे गाँधी के हस्ताक्षर  ने बड़ी भूमिका निभाई थी सत्ता के

लालच में आकर इन वीर सपूतों की हत्या करवाई गई|

इन जैसे और भी जाने कितने वीर सपूतों ने अपनी जान गवां दी इस भारत माता के लिए परन्तु

उनको कभी याद नही किया जाता लेकिन इन घटिया नेताओं 

के नाम के स्मारक बनाये जाते हैं कितनी शर्म की बात है |

ये हिन्दुतान हमारा है किसी विदेशी का गुलाम नही आज भी आज़ादी के इतने सालो बाद यही लगता है

की देश अभी भी आज़ाद नही हुआ है और ये नेता सिर्फ अपनी सोचते हैं

भगत सिंह और चन्द्र शेखर आजाद ने सही कहा था

की सरकार और नेता गूंगे होते हैं इनको सिर्फ अपना दुःख दर्द दिखाई देता है सत्याग्रह या अनशन से

कुछ नही होने वाला जब तक इन के कानो के निचे धमाके नही होंगे तब तक इन को सुनाई नही देगा

इन देश के वीर सपूतों को देश के घटिया नेता आतंकवादी बताते हैं परन्तु सच तो ये हैं आज के समय में

इन नेताओं से बड़ा आतंकवादी कोई नही | इस देश के महान वीरो को मेरा नमन

 

 

इक लाठी थी इक गोली थी

वीर शहीदों ने अपने ही खून में होली खेली थी

आजादी को कहा था हक ना भीक किसी से लेनी थी

वीर शहीदों ने सोचो यातनाये कितनी झेली थी

कोई मांग रहा आज़ादी था जैसे गिरवी वो पड़ी कही

कोई बोल रहा स्वराज तो मेरी भूमि मेरी अपनी

ए अत्याचारी गोरों तुम जाओ….

तुम जाओ इस धरती से जिसको खून से हमने सीचा है

और आज़ादी के इस अंकुर को क्या कभी ख़तम कर पाओगे?

जो एक भगत ने देश हिलाया तुम और कहाँ सह पाओगे?

जो राज गुरु की राजनीति ने राज किया दिल पर सब के

ए गोरों तुम बोलो के कैसे राज यहाँ कर पाओगे?

सुखदेव ने दिए जो प्राण साथ क्या तुम ऐसा कर पाओगे?

देश बचाने को अपना क्या सूली पर चढ़ पाओगे?

हम याद नहीं करते कैसे उनको जिनसे क्रांति देश में आई थी

गर वो ना होते तो लाठी ने कहा आज़ादी दिलाई थी

खून जो खौला तब तो आवाजो ने भी ग़दर मचाई थी

खून खौलाने को ही तो देशभक्तों ने जान गवाई थी

आज चलो फिर आग लगा लें द्रद्ता को अपनाना है

देशद्रोही इन भ्रष्टों से इस राष्ट्र को बचाना है

आज को फिर आवाज़ उठाये ऐसा कुछ कर जाना है

हो सुखी जहा निर्भ्रष्ट कर्मी ऐसा एक उज्वल राष्ट्र बनाना है…..

यह कविता भारत माता के एक पुत्र शुभमजैन ने लिखी है

 

 

वन्देमातरम्