KT.v-1.5 Think Before degrading someone

मनुष्य एक जीव होते हुए भी शेष जीवों से भिन्न है क्यूँ कारण मनुष्य जीवन समाप्त होने के पश्चात भी जीना चाहता है और इसका केवल एक ही मार्ग है सम्मान जो मनुष्य की मृत्यु के पश्चात भी जीवित रहता है उस सम्मान को पाने के लिए मनुष्य वर्षों प्रयास और प्रयत्न करता है उस सम्मान को पाने के लिए मनुष्य वर्षों प्रयास और प्रयत्न करता है और ऐसे में शत्रु के लिए सबसे सरल लक्ष्य बन जाता है आपका सम्मान

हम अपने शत्रु का अपमान करके उसके वर्षों के कमाए हुए सम्मान को छिन्न भिन्न कर देना चाहते हैं परंतु कर्म करने से पूर्व परिणाम पर एक बार विचार अवश्य कर लीजिएगा वर्षों से संचित शत्रु के मान को भंग कर के आप को संतोष अवश्य मिल सकता है परंतु वो शत्रु अपने जीवन के शेष हर पल को उस अपमान के उत्तर में लगा देता है तो इसीलिए सावधान रहिए किसी का अपमान आपके लिए भी हानिकारक हो सकता है

Humans are creatures of a species different from the rest the reason Man wants to live life even after completion and for that only one way is honor which stays with human after life. Man put year of efforts to earn that respect but that respect is easy target for  enemy.

If you try to destroy the respect of your enemy by dis-respecting him who he earned in years, but before action consider the outcome once.By dissolving respect accumulated over the years of enemy can definitely get satisfaction to you but the rest of his life every moment that enemy will try to hit back. So be aware someone’s disrespect could be dangerous for you too.

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